Gk in MP in Hindi For MPPSC मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान 2021

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मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान MPPSC Gk in MP

Gk in MP in Hindi For MPPSC मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान 2021

साँची स्तूप सामान्य ज्ञान

  • ये म.प्र. के रायसेन जिले में स्थित है इसका निर्माण अशोक द्वारा करवाया गया , ये स्तूप भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित करता हैं।
  • सांची स्तूप एक अर्ध-चक्करदार चट्टान से बना हुआ जिसे हम गोल गुम्बद भी कह सकते है|
  • यह सभी स्तूपों में से सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है| इस महान स्मारक को भगवान स्तूप बुद्ध के अवशेषों के आधार पर बनाया गया
  • इसे मध्यकालीन युग में पत्थरों से सजाया गया था| ढांचे और डिजाइनों में स्तूप के विकास के दौरान प्रेम और ऐतिहासिक काल की प्रकृति को दर्शाया गया है।
  • साँची के स्तूप में बहुत से ब्राह्मी शिलालेख है। उनमे से कुछ छोटे है और कुछ लोगो के डोनेशन से भी बनाये गए है, वहाँ बने सभी शिलालेख इतिहासिक वास्तुकला को दर्शाते है। 1837 में जेम्स प्रिन्सेप ने इसका वर्णन अपने लेखो में भी किया था

सन्यासी विद्रोह सामान्य ज्ञान

सन्यासी विद्रोह (1763-1800) – यह विद्रोह बंगाल (और बिहार) में हुआ। यह मूलतः कृषक विद्रोह था जिसकी अगुवाई सन्यासियों ने किया।

मजनू शाह, चिराग अली, भवानी पाठक, देवी चौधरानी इस विद्रोह के मुख्य नेता थे। बांग्ला भाषा के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का सन 1882 में रचित उपन्यास आनन्द मठ इसी विद्रोह की घटना पर आधारित है।

कारण-बंगाल में सबसे ज्यादा अत्याचार हिंदुओं पर होता था। अंग्रेज ने हिंदुओं को उनके तीर्थ स्थानों पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसके चलते शांत रहने वाले संन्यासियों में असंतोष फैल गया। परिणाम -अंग्रेजों के विरुद्ध सन् 1763 से 1773 तक चला संन्यासी आंदोलन सबसे प्रबल आंदोलन था। आदिगुरु शंकराचार्य के दसनामी संप्रदाय ने एकजुट होकर भारतीय धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए शस्त्र युद्ध का बिगुल बजाया।

शंकराचार्य के अनुयायियों को देखकर मुस्लिम फकीरों ने भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन में भाग लिया। संन्यासी-फकीरों के इस विद्रोह में उन्होंने अंग्रेजों की कई कोठियों पर कब्जा कर अंग्रेज अफसरों को मौत के घाट उतार दिया। विद्रोह को कुचलने के लिए वारेन हेस्टिंग्स को कठोर कार्रवाई करनी पड़ी थी। उन्होंने बेरहमी से संन्यासियों और हिन्दू जन्चा का कत्लेआम किया।

नर्मदा घाटी परियोजना सरदार सरोवर परियोजना, इंदिरा सागर परियोजना, महेश्वर परियोजना, ओम्कारेश्वर परियोजना सम्मिलित है ।

सरदार सरोवर परियोजना गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र की संयुक्त परियोजना है। मध्यप्रदेश, इंदिरा गांधी नर्मदा सागर परियोजना मध्यप्रदेश के खंडवा( पुनासा) जिले में स्थित है !( इंदिरा परियोजना का शिलान्यास 1984 में इंदिरा गांधी ने किया था) सरदार सरोवर परियोजना गुजरात में भडोच के निकट है।

इंदिरा सागर बांध ओम्कारेश्वर दो वृहद सिंचाई परियोजना है जिनसे 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होता है।

नर्मदा उसकी 41 सहायक नदियों का अपवाह तंत्र 95,000 वर्ग किलोमीटर है । नर्मदा घाटी परियोजना में मध्य प्रदेश की 29 बड़ी, 135 मध्यम तथा 3000 लघु सिंचाई योजनाएं शामिल है ।

नर्मदा घाटी परियोजना से 27 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। नर्मदा घाटी परियोजना से मध्य प्रदेश के लगभग 15 जिले

शहडोल, मंडला, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, होशंगाबाद, हरदा,खंडवा, खरगोन, बड़वानी आदि जिले लाभान्वित होते हैं ।

माताटीला बांध परियोजना सामान्य ज्ञान

यह परियोजना बेतवा नदी पर स्थित है इसे( रानी लक्ष्मीबाई परियोजना )के नाम से भी जाना जाता है

  • इस परियोजना से मध्य प्रदेश के 6 जिले( दतिया ग्वालियर भिंड विदिशा रायसेन आदि जिले तथा उत्तर प्रदेश के 4 जिले लाभान्वित होते हैं इस परियोजना पर माताटीला जल विद्युत गृह भी है|
  • यह मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना है मध्य प्रदेश में 1.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तथा उत्तर प्रदेश में 1.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है
  • 1921 का मोपला विद्रोह क्या है? मोपला विद्रोह वर्ष 1920 ई. में केरल के मालाबार क्षेत्र में मोपलाओं(मुस्लिम किसान) द्वारा किया गया था इस आन्दोलन के मुख्य नेता के रूप में ‘अली मुसलियार’ चर्चित थे
  • मोपला विदेशी शासन, हिन्दू जमींदारों और साहूकारों से पीड़ित थे. अपनी दुःखद स्थिति से लाचार होकर 19-20 वीं शताब्दी में मोपलाओं ने बार-बार विरोध और आक्रोश प्रकट किया.
  • इन विरोधों का कारण किसानों को जमीन से बेदखल किया जाना, लगान में मनमाने ढंग से वृद्धि किया जाना आदि हैं. विद्रोह की प्रकृति मोपला के किसानों का आन्दोलन हिंसात्मक था. मोपलाओं ने जमींदारों के घरों में धावा बोला, धन लूटे और हत्या की. मंदिरों की भी संपत्ति लूटी गई. साहूकारों को भी मौत के घाट उतारा गया. पूरे मालाबार में अशांति फैल गई.
  • विद्रोह का अंत सरकार ने बलपूर्वक मोपला विद्रोह को दबा दिया. इस विद्रोह में संगठनात्मक कमजोरियाँ थीं. यह विद्रोह लम्बे समय तक के लिए टिक नहीं पाया. मोपलाओं को अपने आन्दोलन में कुछ बड़े किसानों का भी सहयोग मिला.

जो मोपला विद्रोह 1921 में हुआ वह बहुत ही व्यापक था. इस विद्रोह को दबाने के लिए तो सरकार को सेना की मदद लेनी पड़ी थी. ब्लॉक पर्वत (Block mountaih) जब चट्टानों में स्थित भ्रंश के कारण मध्य भाग नीचे धंस जाता है और अगल-बगल के भाग ऊंचे उठे लगते हैं, तो वो ब्लॉक पर्वत कहलाते हैं. बीच में धंसे भाग को रिफ्ट घाटी कहते हैं. इन पर्वतों के शीर्ष समतल और किनारे तीव्र भ्रंश-कगारों से सीमित होते है इस तरह ते पर्वत के उदाहरण हैं- वॉस्जेस (फ्रांस), ब्लैक फॉरेस्ट (जर्मनी), साल्ट रेंज (पाकिस्तान) वलित त (Fold mountain)- पूर्वत ये पृथ्वी की आन्तरिक शक्तियों से धरातल की चट्टानों के मुड़ जाने से बनते हैं. ये लहरदार पर्वत होते हैं, जिन पर असंख्य अपनतियां और अभिनतियां होती हैं.

जैसे- हिमालय, आल्पस यूराल, रॉकीज और एण्डीज. वलित पर्वतों के निर्माण का आधुनिक सिंद्धात प्लेट टेक्टॉनिक (Plate Tectonics) की संकल्पना पर आधारित है भारत का अरावली पर्वत विश्व के सबसे पुराने वलित पर्वतों में गिना जाता है. इसकी सबसे ऊंची चोटी माउण्ट आबू के पास गुरुशिखर है

राज्य सभा की पृष्ठभूमि एवं संरचना सामान्य ज्ञान

काउंसिल ऑफ स्टेट्स, जिसे राज्य सभा भी कहा जाता है, एक ऐसा नाम है जिसकी घोषणा सभापीठ द्वारा सभा में 23 अगस्त, 1954 को की गई थी। इसकी अपनी खास विशेषताएं हैं। भारत में द्वितीय सदन का प्रारम्भ 1918 के मोन्टेग-चेम्सफोर्ड प्रतिवेदन से हुआ।

भारत सरकार अधिनियम, 1919 में तत्कालीन विधानमंडल के द्वितीय सदन के तौर पर काउंसिल ऑफ स्टेट्स का सृजन करने का उपबंध किया गया जिसका विशेषाधिकार सीमित था और जो वस्तुत: 1921 में अस्तित्व में आया।

संविधान के अनुच्छेद 80 में राज्य सभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित की गई है, जिनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्देशित किए जाते हैं और 238 सदस्य राज्यों के और संघ राज्य क्षेत्रों के प्रतिनिधि होते हैं।

तथापि, राज्य सभा के सदस्यों की वर्तमान संख्या 245 है, जिनमें से 233 सदस्य राज्यों और संघ राज्यक्षेत्र दिल्ली तथा पुडुचेरी के प्रतिनिधि हैं और 12 राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्देशित हैं। संविधान की चौथी अनुसूची में राज्य सभा में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को स्थानों के आवंटन का उपबंध है। स्थानों का आवंटन प्रत्येक राज्य की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 84 में संसद की सदस्यता के लिए अर्हताएं निर्धारित की गई हैं एवं संविधान के अनुच्छेद 102 में निरर्हताएं निर्धारित की गई है

वेदांग से क्या तात्पर्य है?

वेदों का अर्थ ठीक-ठीक समझने के लिए वेदांगों की रचना हुई। वेदांग कुल 6 हैं। ये सूत्र साहित्य के अंतर्गत आते है। ये निम्नलिखित है

  1. शिक्षा- इसका निर्माण वैश्विक स्वरों के शुद्ध उच्चारण के है। लिए दिया गया है|
  2. कल्प – इनमें विधि एवं नियम का उल्लेख है |
  3. व्याकरण – इनमें नामों एवं धातुओं की रचना, उपसर्ग तथा प्रत्यय के प्रयोग, समासों एवं संधि आदि के नियम बताए गए है।
  4. निरुक्त -इसका अर्थ क्यों होता है, यह बताने वाले शास्त्र को निरुक्त कहते हैं | यह एक प्रकार का भाषा विज्ञान है।
  5. छंद -वैदिक साहित्य में गायत्री, जगती आदि शब्दों का प्रयोग हुआ है|
  6. ज्योतिष – ज्योतिषशास्त्र के विकास का वर्णन प्रस्तुत किया गया है |

राज्य परिषद (राज्य सभा) पृष्ठभूमि और संरचना

‘राज्यों की परिषद’ जिसे राज्य सभा के रूप में भी जाना जाता है, ए नामकरण जो सदन में अध्यक्ष द्वारा घोषित किया गया था

23 अगस्त, 1954 की अपनी विशिष्ट विशेषताएं हैं। दूसरे चैंबर की उत्पत्ति का पता 1918 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। भारत सरकार अधिनियम, 1919 एक प्रतिबंधित मताधिकार के साथ तत्कालीन विधायिका के दूसरे कक्ष के रूप में ‘राज्य परिषद’ के निर्माण के लिए प्रदान किया गया था। 1921 में अस्तित्व में आया।

रचना – संविधान का अनुच्छेद राज्य सभा की अधिकतम शक्ति 250 को कम करता है, जिसमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामित किए जाते हैं और 23 राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं।

हालाँकि, राज्य सभा की वर्तमान शक्ति 245 है, जिसमें से 233 दिल्ली और पुदुचेरी के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि हैं और 12 राष्ट्रपति द्वारा नामित हैं। राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे मामलों के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्ति होते हैं।

संविधान की चौथी अनुसूची में राज्य सभा में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सीटें आवंटित करने का प्रावधान है। सीटों का आवंटन प्रत्येक राज्य की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है।

योग्यताएँ संविधान का अनुच्छेद 84 संसद की सदस्यता के लिए योग्यताएँ निर्धारित करता है। संविधान के अनुच्छेद 102 में विसंगतियाँ हैं।

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